
भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को हुई थी। यूपीआई का आधिकारिक पायलट लॉन्च मुंबई में किया गया था। लॉन्च के समय इस पायलट प्रोजेक्ट में केवल 21 सदस्य बैंक शामिल थे। इसके बाद, 25 अगस्त 2016 से बैंकों ने अपने यूपीआई-सक्षम ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करना शुरू किया और यह आम जनता के लिए पूरी तरह उपलब्ध हो गया। आज यूपीआई 28.9 लाख करोड़ से अधिक लेनदेन मूल्य, 18 अरब मासिक ट्रांजैक्शन, 50 करोड़ लिंक्ड बैंक खाते, 600 बैंकों का समर्थन और लाखों व्यापारियों द्वारा स्वीकार्यता के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का वैश्विक मानक बन चुका है। यह वित्तीय समावेशन को सशक्त करते हुए डिजिटल नवाचार को नई गति दे रहा है। आज भारत का यूपीआई अपनी तकनीकी श्रेष्ठता, सुरक्षा और व्यापक पहुंच के कारण दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन चुका है। यह दुनिया के रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का लगभग 49% हिस्सा संभालता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी मान्यता मिली है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत को तत्काल भुगतान (फास्ट पेमेंट्स) के क्षेत्र में वैश्विक नेता माना है। यूपीआई अब न केवल भारत के डिजिटल वित्तीय तंत्र की रीढ़ है, बल्कि अन्य देशों के लिए भी वित्तीय समावेशन प्राप्त करने का एक आदर्श मॉडल बन चुका है।
भारत ने यूपीआई को सीमाओं के पार ले जाने के लिए कई देशों के साथ समझौते किए हैं। वर्तमान में, यह सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, कतर, कंबोडिया और ग्रीस जैसे कई देशों में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसके अलावा, इंडोनेशिया और न्यूज़ीलैंड जैसे अन्य देश भी इसे अपने सिस्टम में एकीकृत करने के लिए तत्पर हैं।
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