
हिंदू धर्म, ज्योतिष और योग में 108 की संख्या की बेहद पवित्र मान्यता है। यह संख्या ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच के गहरे संबंधों को दर्शाती है। हिंदू धर्म में कुल 108 उपनिषद हैं। इसके अलावा, विष्णु मंदिरों के 108 दिव्य देशम और 108 शक्तिपीठों का भी उल्लेख मिलता है। सांसारिक बंधनों से मुक्ति के लिए जाप की जाने वाली मंत्र जप माला में भी 108 मनके होते हैं। वैदिक ज्योतिष में 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं। जब इन दोनों का गुणा किया जाता है, तो 108 प्राप्त होता है। इसी के साथ ज्योतिष में 27 नक्षत्र माने गए हैं, और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। यदि इनका गुणा किया जाए तो संख्या 108 निकाल कर आती है। योग विज्ञान में, मानव शरीर में 108 मर्म बिंदु, ऊर्जा के केंद्र बताए गए हैं। वास्तुकला और पवित्र ज्यामिति में पंचकोण को बहुत संतुलित और शक्तिशाली आकार माना जाता है, और एक नियमित पंचकोण के भीतर बनने वाला प्रत्येक आंतरिक कोण हमेशा 108 डिग्री का होता है।
इतना ही नहीं खगोलीय स्तर पर देखे तो, पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी, सूर्य के अपने व्यास का लगभग 108
गुना है। इसी तरह, पृथ्वी से चंद्रमा की औसत दूरी, चंद्रमा के अपने व्यास का लगभग 108 गुना है।
सूर्य का व्यास, हमारी पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है।
108 केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह अध्यात्म और विज्ञान के बीच का वो सेतु है, जो यह साबित करता
है कि इस ब्रह्मांड की हर रचना के पीछे एक सटीक गणित काम कर रहा है। प्राचीन ऋषियों ने बाह्य
ब्रह्मांड और हमारे शरीर के आंतरिक ब्रह्मांड के बीच संतुलन बनाने के लिए ही माला में 108 मनके रखे,
ताकि हर जप मनुष्य को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ सके।
आधुनिक खगोलशास्त्री इसे केवल एक अद्भुत ब्रह्मांडीय संयोग मानते है, पर क्या ये केवल कोई संयोग है या प्राचीन वेदिक विज्ञान जो भारतीय ऋषियों- ऋषिकाओ ने हजारों वर्ष पूर्व बता दिया था।
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