
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और मुंबई राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के साथ मिलकर एक बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में की गई इस संयुक्त कार्रवाई में 53 दुर्लभ और लुप्तप्राय जीवों को बचाया गया। इसमे 15 स्लो लोरिस, 2 बिंटुरॉन्ग, 28 स्टार कछुए, 6 मिस्र के गिद्ध और 2 शिकरा पक्षी शामिल थे। ये सभी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत उच्च सुरक्षा वाले जीव हैं।
इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया 3 मुंबई से और 3 कोलकाता से। CBI ने 7-8 जुलाई, 2026
को एफ.आई.आर. दर्ज की, और बचाए गए जीवों को वन विभागों को सौंप दिया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय
न्याय संहिता (BNS), 2023 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए
हैं।
केवल अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, भारत में वन्यजीव अपराध की कम से कम 202 बड़ी घटनाएं सामने आईं है। इसमे जंगलों के भीतर बाघों को जहर देना, हाथियों के दांत की तस्करी और मांस या अंगों के लिए अवैध शिकार करना और बैंकॉक और कुआलालंपुर जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से हवाई मार्ग के जरिए दुर्लभ विदेशी जानवरों को भारत में तस्करी कर लाने के प्रयास शामिल हैं। भारत में वन्यजीव तस्करी के मामलों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और हरियाणा प्रमुख हॉटस्पॉट बने हुए हैं। हर वर्ष औसतन 350-400 मामले आधिकारिक रूप से दर्ज होते है। पर ये सिर्फ आधिकारिक दर्ज मामले है असल आँकड़े इससे कई ज्यादा हो सकते है क्यूंकि कितने ही मामले एसे है जो कभी सामने ही नहीं या पाते और दर्ज नहीं हो पाते।
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